Tuesday, 9 November 2010

दैनिक जागरण की नजर में


इस बात को गोपनीय रखा था ओबामा ने: रिपोर्ट



 अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता पर अपने समर्थन को अंतिम समय तक रहस्य बनाए रखा था। कल भारतीय संसद को संबोधित करने से खड़े होने से कुछ मिनट पहले तक उन्होंने ने इस मामले में भारत को समर्थन देने की अपनी घोषणा के बारे में गोपनीयता बरकरार रखी थी। अमेरिकी अखबारों में मंगलवार को इस खबर को पहले पन्ने पर जगह मिली है।
'वाशिंगटन पोस्ट' ने लिखा है, कि ओबामा ने अपने इस कदम को अंतिम समय तक अपने दिल में छिपाए रखा। संसद में उनका संबोधन शुरू होने से कुछ मिनट पहले तक किसी को यह पता नहीं था कि ओबामा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के मामले में अपने समर्थन की घोषणा करने वाले हैं।
अमेरिकी मीडिया ने भी ओबामा के इस कदम का समर्थन किया है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन को जवाब देने के लिए यह घोषणा की है। अखबार ने लिखा है कि इससे पता चलता है कि अमेरिका, भारत के साथ अपने आर्थिक और रक्षा संबंधों को और मजबूती देना चाहता है। हालांकि, अखबार ने आगाह किया है कि यह अभी तक तय नहीं है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता कब तक मिलेगी। न ही पेशकश में यह गारंटी दी गई है कि भारत को सदस्यता मिलेगी ही।
'न्यूयार्क टाइम्स' ने लिखा है कि ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत को समर्थन चीन को जवाब देने के लिए किया है। ओबामा का यह कदम चीन को जवाब है।
अखबार ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत को समर्थन से राष्ट्रपति ने यह संकेत दे दिया है कि अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच भागीदारी को और ऊंचाई पर ले जाना चाहता है। साथ ही वह भारत के साथ व्यावसायिक रिश्तों को मजबूती देना चाहता है और चीन को जवाब देना चाहता है।
'टाइम्स' ने चेताया है कि इस कदम से चीन में नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। यह अमेरिका के उन प्रयासों का भी संकेत है कि चीन की बढ़ती ताकत के बीच अमेरिका एशियाई देशों से अपने गठजोड़ को और मजबूत करना चाहता है।
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, भारत को 55 साल पहले 1955 में भी स्थाई सदस्यता की पेशकश की गई थी। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ ने भारत को यह पेशकश की थी, पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था। नेहरू ने कहा था कि भारत के बजाय यह सीट चीन को दे दी जाए।
'लॉस एंजिल्स टाइम्स' ने लिखा है कि ओबामा की यह प्रतिबद्धता भारत के नए अंतरराष्ट्रीय दर्जे की दिशा में सिर्फ एक 
कदम है।

अमेरिका को नहीं थी हेडली के इरादों की पुख्ता जानकारी
नई दिल्ली मुंबई हमले के साजिशकर्ता अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली को लेकर भारत और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के बीच पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान के बाद अब खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मामले में सफाई दी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात में उन्होंने बताया कि मुंबई हमले की तैयारियों और इसमें हेडली के शरीक होने को लेकर उन्हें पक्की खबर नहीं थी। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच नए सिरे से उच्चस्तरीय बातचीत शुरू करने का फैसला भी हुआ। साझा बयान में दोनों देशों ने लश्कर-ए-तैयबा सहित सभी आतंकवादी संगठनों को ध्वस्त करने पर सहमति भी जताई। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार बेन रोड्स ने दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद बताया कि ओबामा ने हेडली मामले की जांच के अब तक के नतीजों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है। हालांकि ओबामा ने बताया कि हेडली की साजिश के बारे में मिली जानकारियां किसी ठोस शक्ल में न होकर टुकड़ों में थी। इनके आधार पर यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता था कि मुंबई पर इस तरह के हमले की तैयारी हो रही है। भारत के ऐतराज के बाद अमेरिका ने इस बारे में पूर्ण समीक्षा करने के लिए अपने खुफिया ब्यूरो के प्रमुख को इसकी जांच सौंप दी थी। इस मामले पर भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ओबामा ने इसकी जानकारी सीधे प्रधानमंत्री को दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संसद में अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की जंग को अपना भरपूर नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम लेते हुए उसे सावधान किया कि उनकी सीमा के अंदर आतंकवादियों के लिए अभयारण्य को मंजूर नहीं किया जा सकता। संसद के साझा सत्र में उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तानी नेताओं से यह जोर देकर कहते रहेंगे कि उनकी सीमा के भीतर चल रहे आतंकवादियों के अभयारण्य स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही मुंबई हमले के पीछे शामिल आतंकवादियों को कानून की गिरफ्त में लाना होगा। इसके अलावा दोनों नेताओं के साझा बयान में भी आतंकवाद के खिलाफ साझी लड़ाई की बात विस्तार से आई। इस बयान में कहा गया कि लश्कर-ए-तैयबा सहित सभी आतंकवादी संगठनों को ध्वस्त करने की जरूरत पर दोनों राष्ट्र सहमत हैं। आतंकवाद को मिल रही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद की कड़ी निगरानी की जरूरत पर भी सहमति जताई गई। इससे पहले भारत अमेरिकी सरकार को लेटर रोगट्री भेजकर उससे हेडली की दो बीवियों की शिकायतों के बारे में पूरी जानकारी मांगने की तैयारी में था। अमेरिकी सूत्रों ने हाल में बताया था कि हेडली की पत्नियों ने मुंबई हमले से पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी दे दी थी कि वह भारत के खिलाफ खास अभियान की साजिश रच रहा है। भारत जानना चाहता है कि मुंबई हमले से पहले हेडली की गतिविधियों को लेकर कब-कब और कितनी जानकारी अमेरिकी एजेंसियों के पास थी। पिछले हफ्ते ही चिदंबरम ने हेडली के बारे में अमेरिकी की ओर से जानकारी छुपाने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि अमेरिका में इसकी समीक्षा हो रही है और इसके खत्म होने का इंतजार किया जाना चाहिए

बापू की समाधि पहुंच अभिभूत हुए ओबामा
नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति महात्मा गांधी से सबसे अधिक प्रभावित हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। यह बातें आज फिर उन्होंने राजघाट पर दोहराई। उन्होंने बापू की समाधि पर फूल चढ़ाए तथा उनके जीवन से जुड़ी चीजों को देखा। राजघाट की ओर से उन्हें विशेषतौर पर केरल से मंगाया गया गुलाब की लकड़ी से बना चरखा भेंट किया गया। केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद व महात्मा गांधी समाधि स्थल राजघाट के सचिव रजनीश कुमार भी मौजूद थे। रजनीश कुमार ने बताया कि जब कोई विशिष्ठ अतिथि समाधि स्थल आता है तो उसे गांधी की प्रतिमा भेंट की जाती है, लेकिन ओबामा के लिए विशेषतौर पर केरल से मंगाया गया गुलाब की लकड़ी से निर्मित चरखा भेंट किया गया। ओबामा राजघाट पर करीब 20 मिनट तक रुके तथा उन्होंने गांधी समाधि के बारे में कई छोटी-छोटी जानकारियां प्राप्त करने में रुचि दिखाई। भेंट की गई पुस्तकें : राजघाट के सचिव रजनीश कुमार ने बताया कि ओबामा को तीन पुस्तकें भेंट की गई, जिनमें बापू की आत्मकथा सुशीला नैय्यर लिखित द माइंड आफ महात्मा गांधी और महात्मा गांधी एंड 100 डेज शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को एक्रिलिक की बनी गांधी की प्रतिमा एवं सात बुराइयों को दर्शाने वाले खादी से बना रोल भी भेंट किया गया। ओबामा अपने साथ गांधी समाधि स्थल के लिए बापू के जीवन से प्रभावित मार्टिन लूथर किंग की याद में वाशिंगटन डीसी में बन रहे स्मारक में इस्तेमाल एक पत्थर का टुकड़ा लाए थे। बराक ओबामा ने आगंतुक पुस्तिका में अंग्रेजी में लिखा, उसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है- जिस महान आत्मा ने अपने शांति, संयम, प्यार के संदेश से पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया, हम उसे हमेशा याद रखेंगे। उनके निधन को 60 से अधिक साल गुजरने के बाद भी उनकी आभा दुनिया को प्रेरणा देती है। दूसरी ओर बापू के समाधि स्थल से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रस्थान के बाद राजघाट पर बड़ी संख्या में पर्यटक आने शुरू हो गए और विशेषतौर पर बच्चों में समाधि स्थल पर ओबामा की ओर से अर्पित बड़े पुष्प चक्र के समक्ष बैठकर फोटो खिंचवाने की होड़ लगी हुई थी। सुरक्षा कारणों से राजघाट को आम जनता के लिए तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया था। ओबामा की ओर से बापू की समाधि पर अर्पित पुष्पचक्र के समक्ष बैठकर फोटो खिंचवाने के लिए कतार लग गई थी

बराक भी बीवी के आगे हो जाते हैं चित
नई दिल्ली जिसके नाम की पूरी दुनिया में धाक है, वह व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने चित हो जाता है। भले ही यह आश्चर्यजनक लगे लेकिन सत्य है। विश्व के सबसे ताकतवर व्यक्ति व अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा पत्नी मिशेल के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। इसका खुलासा मिशेल ओबामा ने सोमवार सुबह राजधानी में स्कूली छात्रों से खास मुलाकात के दौरान किया। उन्होंने छात्रों के सवाल के जवाब में कहा कि पति-पत्नी के बीच झगड़ा होने के बाद बराक ओबामा ही उन्हें मनाते हैं। अमेरिका की पहली महिला मिशेल ओबामा ने भारत के चार संस्थाओं के 17 छात्र-छात्राओं को मिलने का आमंत्रण भेजा था। सोमवार दोपहर प्रगति मैदान के नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम में उन्होंने छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से भारतीय सभ्यता व संस्कृति के बारे में जानकारी ली और छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया। नन्हीं छाया संगठन के नेतृत्व में पंजाब व राजस्थान की चार प्रतिभाशाली व गरीब छात्राएं मिशेल ओबामा से मिलने की खुशी से फूले नहीं समा रही हैं। पंजाब के अमृतसर जिले की दलित छात्रा मनप्रीत कौर व रमनप्रीत कौर ने उन्हें पंजाबी में लिखा पत्र भी सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा था कि हथियार मत बेचो क्योंकि यह देशों में नफरत फैलाते हैं। छात्राओं ने समाज में खुशहाली लाने के लिए प्यार बांटने का पैगाम दिया। मिशेल के अमृतसर नहीं आने के सवाल पर उन्होंने छात्रों से वायदा किया वे अगली बार अमृतसर आएंगी तथा स्वर्ण मंदिर के दर्शन जरूर करेंगी। उन्होंने छात्राओं के पत्र का जबाव भी देने का आश्वासन दिया। राजस्थान के श्रीगंगा नगर जिले से आई छठी की छात्रा अप्रीत तथा अंकिता ने मिशेल से पूछा कि उन्हें भारत में क्या पसंद आया तो उन्होंने कहा कि भारत के खाने का कोई जबाव नहीं है। वह डेढ़ घंटे तक छात्रों के साथ रहीं। उन्होंने छात्रों को व्हाइट हाउस के लोगो वाला हैंड बैग सहित अपने हस्ताक्षर वाला मिठाई का डब्बा, मार्कर व विशेष टोपी भी दी। छात्राओं का कहना है कि इस मुलाकात से उन्हें समाज के लिए कुछ करने की सीख मिली है। इन छात्राओं के साथ अमृतसर के किला जीवन सिंह गांव की युवा महिला सरपंच बलजीत कौर व शिक्षक मनप्रीत कौर भी मौजूद थीं। नन्हीं छाया के चेयरमैन हरपाल सिंह ने बताया कि उनकी संस्था राजस्थान, पंजाब व दिल्ली में लिंग अनुपात व पर्यावरण संरक्षण पर लोगों को जागरूक कर रही है। इस काम में उन्हें इन छात्राओं का सराहनीय योगदान मिल रहा है। ओबामा ने लिया स्पा का मजा आईटीसी मौर्या में ठहरे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत में अपने सबसे व्यस्त दिन की शुरुआत इस होटल के स्पा में बिता कर की। पांच सितारा होटल के स्पा कायाकल्प में अपने तन-मन को स्फूर्ति से भर लिया। साथ ही हल्का व्यायाम भी किया। इसी होटल के बुखारा रेस्तरां में बराक ओबामा अपनी पत्‍‌नी मिशेल के साथ शाम को ओबामा थाली का आनंद उठाया। इस थाली में कबाब, टिक्का, सलाद और पारंपरिक भारतीय मिठाइयां शामिल रहीं। ओबामा थाली में तंदूरी रान, तंदूरी सलाद, मुर्ग खुरचन, फिश टिक्का, रेशमी कबाब, शिकंदरी रान और तंदूरी आलू जैसे उत्तर भारतीय और मुगलई व्यंजनों का एक अच्छा मिश्रण शामिल है। मिठाई के रूप में ओबामा के पास रसमलाई और कुल्फी का विकल्प था



अब बराबरी पर हुई अमेरिका से बात
नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे ने पहली बार दोनों देशों के रिश्तों की इबारत को बराबरी पर साधने की कोशिश की। इसमें आतंकवाद को लेकर भारत की रणनीतिक जरूरतों और तेज रफ्तार विकास के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को जगह दी गई है। वहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारत की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के इंजन से जोड़ने का भी इंतजाम है। ओबामा जाते जाते विदाई तोहफे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर भारतीय दावे पर समर्थन का ऐलान कर गए तो अपनी अर्थव्यवस्था के लिए एक लाख से अधिक रोजगार देने वाले सौदे बटोर ले गए। हालांकि दोनों देशों के रिश्तों में आउटसोर्सिग से लेकर आतंकवाद पर जमीनी सहयोग के ऐसे कई मोर्चे हैं जहां भागीदारी के नारे तो हैं लेकिन जमीनी साझेदारी का रास्ता पथरीला है। भारतीय खेमे की नजर में ओबामा के दौरे ने दोनों देशों के रिश्ते को दाता और याचक की बजाए बराबरी के लेन-देन में बदलने में मदद की है। वैसे इस बार कई मोर्चो पर भारत का सख्त रुख भी देखने को मिला। मामला पाक समर्थित आतंकवाद पर अमेरिका के रुख का हो या फिर आउटसोर्सिग और अमेरिकी अर्थव्यव्सथा में बढ़ती संरक्षणवादी नीतियों का। हर मोर्चे पर दोनों देशों के बीच सियासी संकेतों से लेकर ठोस करारों के सौदे साफ नजर आए। परमाणु करार के बाद भारत के साथ अमेरिका ने नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की भागीदारी का ऐलान किया। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के दौरे को कठिन बता चुके ओबामा मेजबान के आग्रह को भी नहीं ठुकरा पाए और रवाना होने से पहले इसका ऐलान कर गए। ओबामा को फौरी तौर पर कोई बड़ा तोहफा हाथ न लगा हो लेकिन भारत की रक्षा खरीद के केक में बड़ी अमेरिकी हिस्सेदारी के दावे को और मजबूत कर दिया है। वहीं दस सी-17 विमानों के सौदे ने अमेरिका के कैलिफोर्निया के लांग बीच स्थित बोइंग प्लांट में कई नौकरियों की व्यवस्था कर दी है

शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसून में बढ़ेगा सहयोग
नई दिल्ली कुछ ठोस नतीजे भले ही अभी सामने न हों, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे के साथ भारत-अमेरिका के बीच शैक्षिक रिश्ते की गर्माहट जरूर बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा में कई तरह के आदान-प्रदान और एक दूसरे को मजबूती देने की जमीन तैयार हो गई है। उसे और आगे बढ़ाने के लिए ही दोनों देश अगले साल उच्च शिक्षा पर साझा सम्मेलन (एजूकेशन समिट) करेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह अभी नहीं तय है कि एजूकेशन समिट कहां होगी, लेकिन इतना जरूर है कि उससे दोनों देशों के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान का रास्ता जरूर खुलेगा। बताते हैं कि भारत की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और अमेरिका की ओर से वहां की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन इस समिट की अगुआई करेंगी। इस बीच ओबामा के भारत दौरे के साथ ही ज्ञान आधारित पहल के लिए मनमोहन सिंह-ओबामा संयुक्त कार्यसमूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप फॉर सिंह-ओबामा नॉलेज इनीशिएटिव) में तेजी आ गई है। बीते साल नवंबर में शुरू हुई इस पहल के लिए भारत सरकार ने समूह का गठन कर दिया है। भारत की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक नायर, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अपर सचिव (उच्च शिक्षा) सुनील कुमार और संयुक्त सचिव अमित खरे उसमें शामिल हैं जबकि अमेरिकी उच्चायोग के अधिकारी माइकल प्लेटियर, एलिजाबेथ थारनिल और एलिजावेथ वारफील्ड को इस समूह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस पहल के तहत दोनों देशों को 5-5 मिलियन डॉलर का साझा फंड बनाना था। भारत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उसके लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिए हैं। पहल के आगे बढ़ने के साथ ही दोनों देशों के विश्वविद्यालयों व दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों को एक-दूसरे के करीब आने, मौजूदा जरूरतों के लिहाज से शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और उनके आदान-प्रदान का भी रास्ता खुलेगा। उसी क्रम में भारत ने नेहरू फुलब्राइट स्कॉलरशिप में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी का भी फैसला किया है। यह स्कॉलरशिप अमेरिका जाकर पढ़ाई करने वाले प्रतिभाशाली भारतीय छात्रों को दी जाती है। इस बीच, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने उच्च शिक्षा में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए नई कोलाबोरेशन नीति बनाने का फैसला किया है



बहुत धन्यवाद.. महात्मा गांधी..जयहिंद!
नई दिल्ली संसद में राष्ट्रपति ओबामा ने अपने भाषण में राष्ट्रपति महात्मा गांधी से लेकर धन्यवाद, पंचतंत्र और जयहिंद जैसे कई ऐसे प्रचलित हिंदी शब्दों का प्रयोग किया जिनसे आम भारतीय की नब्ज को छुआ जा सकता है। अपने 36 मिनट के धाराप्रवाह भाषण में ओबामा ने 37 बार सांसदों की तालियां बटोरीं जिनमें सबसे ज्यादा देर तक तालियां तब बजीं जब ओबामा ने पाकिस्तान को आतंकवाद का अभयारण्य बनने के खिलाफ नसीहत दी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारतीय दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया। संसद भवन के पोर्टिको में ओबामा का काफिला ठीक शाम 5:28 बजे पहंुचा। उप राष्ट्रपति मुहम्मद हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार व संसदीय कार्य पवन कुमार बंसल ने उनकी अगुवानी की। संसद के केंद्रीय कक्ष में पहुंचते ही ओबामा ने सांसदों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को देखकर ओबामा पहले थोड़ा ठिठके, फिर अपनी तरफ से हाथ मिलाया और आगे बढ़ गए। बाद में उन्होंने गोल्डन बुक में बाएं हाथ से अपनी लंबी टिप्पणी दर्ज की। उप राष्ट्रपति के स्वागत भाषण के बाद ओबामा ने 5:41 बजे अपने भाषण की शुरुआत की। भाषण के दौरान उन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, बहुत धन्यवाद, पंचायत, पंचतंत्र जैसे हिंदी शब्दों का प्रयोग किया। यही नहीं, कोलकाता, पंजाब, चांदनी चौक व बंगलुरु का भी जिक्र करना भी नहीं भूले। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की कृति गीतांजलि की कुछ पंक्तियों को भी उद्धृत किया जबकि जयहिंद बोलकर अपने भाषण का समापन किया। उन्होंने एक से अधिक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया। इस दौरान जहां खूब तालियां बजीं वहीं वामपंथी सदस्यों ने इससे गुरेज किया। ओबामा ने मीरा कुमार के समापन भाषण के अंग्रेजी अंश को गौर से सुना, लेकिन जैसे ही मीरा ने हिंदी में बोलना शुरू किया, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भाषाई अनुवाद सुनने के लिए कान में हेड फोन लगा लिया। 6:25 बजे कार्यक्रम के समापन के बाद बाहर निकलते समय ओबामा ने उपस्थित जनों का फिर से अभिवादन किया। इस दौरान सपा सांसद घनश्याम अनुरागी व कांग्रेस सांसद महाबल मिश्रा ने उनसे हाथ मिलाया। इस बीच बसपा के राज्यसभा सांसद प्रमोद कुरील ने अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ किताबें भेंट कीं। सांसदों ने ओबामा का भाषण गर्मजोशी से सुना। संसद के केंद्रीय कक्ष में पौने दो बजे से ही सांसदों का आना शुरू हो गया था। केंद्रीय कक्ष की सीटें भर जाने पर कुछ लौट गए तो कुछ ने संसद भवन के दूसरे कक्षों में बैठकर अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण सुना। केंद्रीय कक्ष को जाने वाले रास्तों व संसद भवन के गलियारों और अन्य स्थानों को रेड कारपेट व फूलों से सजाया गया था

कृषि-रिटेल के दरवाजे खोले भारत
नई दिल्ली अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के पहले दिन ही राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साफ कर दिया कि उनके एजेंडे में आर्थिक संबंध सबसे ऊपर हैं। देश के शीर्ष उद्योग जगत के साथ अपनी पहली बैठक में ओबामा ने भारतीय नीति निर्धारकों को भी संदेश दे दिया है कि वह यहां रिटेल क्षेत्र को खोलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आउटसोर्सिग पर अपने रवैये में कोई खास नरमी नहीं दिखाते हुए बराक ने भारत को उच्च तकनीकी का निर्यात शुरू करने के संकेत जरूर दिए। अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) की तरफ से मुंबई में आयोजित बैठक में दोनों देशों के सैकड़ों उद्योगपति और शीर्ष कंपनियों के सीईओ मौजूद थे। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अपनेएजेंडे को रखने का इससे बढि़या मौका नहीं मिल सकता था। उन्होंने इसका फायदा भी भरपूर उठाया। पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति की भरपूर सराहना करते हुए ओबामा ने भारत को भविष्य का बाजार बताया। यही कारण है कि उन्होंने हर उस मुद्दे को उठाया, जो अमेरिकी कंपनियों के हित का है। अपने भाषण में उन्होंने दो बार रिटेल का जिक्र किया और परोक्ष तौर पर यह संदेश भी दिया कि इसके खोले जाने से भारत की छोटी खुदरा दुकाने बंद नहीं होंगी। उन्होंने रिटेल और संचार दो ऐसे क्षेत्र बताए, जहां व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की बेहद जरूरत है। इस क्रम में उन्होंने कृषि का भी जिक्र किया। अमेरिकी कंपनियां भारत की कृषि व रिटेल क्षेत्र में ज्यादा उदारवादी नीतियों के लिए पहले से ही लॉबिंग कर रही हैं। ओबामा की नजर में ढांचागत व नियामक संबंधित समस्याएं भी काफी महत्व रखती हैं। आउटसोर्सिग पर ओबामा ने खास अंदाज में कहा कि अमेरिका में कई लोग यह समझते हैं कि वहां की नौकरियां भारत आ रही हैं। इसमें सच्चाई भी है। वैसे उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ते को संभावनाओं से काफी कम बताया। बराक ने कहा कि अमेरिका भारत से ज्यादा नीदरलैंड को निर्यात करता है, जिसकी आबादी मुंबई से भी कम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं। ओबामा के शब्दों में, मुझे ऐसी कोई वजह दिखाई नहीं देती कि भारत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देशों में क्यों नहीं शामिल हो सकता। अमेरिकी कंपनियों के लिए भरपूर बैटिंग करने के साथ ही ओबामा ने भारतीय उद्योग जगत और राजनेताओं को भी भरोसा दिलाया कि वह द्विपक्षीय रिश्ते में उनकी दिक्कतों को दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार एक तरफा नहीं हो सकता, फायदा दोनों का होना चाहिए। व्यापार संबंधी अन्य दिक्कतों पर उनके व्यापार सचिव अगले कुछ महीनों के भीतर ही भारत की यात्रा करेंगे, जहां इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। भारत का मध्यवर्ग अमेरिकी कंपनियों को करेगा आकर्षित नई दिल्ली, एजेंसी : अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत की तेजी से बढ रही मध्यवर्गीय आबादी अमेरिकी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करेगी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री गैरी लाक ने कहा कि उनका देश भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी, बिजली, वित्तीय सेवाओं, उच्च प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और व्यापार के विशाल अवसर देख रहा है। राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा के संदर्भ में लाक ने यह स्पष्ट किया किया कि भारतीय उद्यमियों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत की प्राथमिकताओं में भारत के खुदरा व्यवसाय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम और उदार बनाने के मुद्दे को विशेष महत्व देने जैसी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की बढती मध्यवर्गीय आबादी अमेरिकी कंपनियों को यहां निवेश के लिए निश्चित रूप से आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सामानों को भारत में असेंबल करके उनका कारोबार करने की विशाल संभावना है। इससे भारत में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के उपलक्ष्य में भारत आई अमेरिकी उद्योग जगत की हस्तियों में जीई कंपनी के इमेल्ट, हानीवेल के डैवेकोटे, पेप्सी की इंदिरा नूई, एईएस के पाल हैनराहन और बोईंग के कुछ प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डोनिलोन ने मुंबई में एक बयान में कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत अमेरिकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मकबरा देख ओबामा बोले, अद्भुत
नई दिल्ली ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा ने मुगल काल की बेमिसाल इमारत हुमायूं का मकबरा देखा। यह ऐतिहासिक विरासत 450 साल पुरानी है। इस स्मारक की खासियत यह है कि इसमें तीन देशों की वास्तुकला दिखाई देती है। मकबरे की छतरियां व कलश भारतीय वास्तुकला का नमूना है तो मुख्य गुम्बद का डिजाइन समरकंद का है और आर्च में पश्चिमी सभ्यता की झलक है। ओबामा के साथ उनकी पत्‍‌नी मिशेल ओबामा भी थीं। आपको बता दें कि हुमायूं के मकबरे से ही प्रेरित होकर वास्तुकारों ने दुनिया के सातवें अजूबे में शामिल आगरा के ताजमहल के निर्माण का रास्ता तैयार किया था। इसी इमारत की वास्तु के तर्ज पर 17वीं सदी में ताजमहल का निर्माण किया गया था। ओबामा अमेरिका के पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो हुमायूं का मकबरा देखने गए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक गौतम सेनगुप्ता, दिल्ली मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. के.के. मोहम्मद, आगा खां ट्रस्ट के दिल्ली मंडल के संयोजक व वरिष्ठ वास्तुकार रतीश नंदा, एएसआई के अधिकारी बसंत कुमार व आर.के. झिंगन ने प्रवेश द्वार पर ओबामा का स्वागत किया। ओबामा ने जब गेट से प्रवेश किया तो मुख्य इमारत को देखकर उन्होंने कहा कि अद्भुत इमारत है। एएसआई के दिल्ली मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. के.के. मोहम्मद ओबामा दंपति को मकबरा दिखाने ले गए। उन्होंने पूरे मकबरे का भ्रमण किया तथा बारीकी से जानकारियां लीं। उन्होंने हुमायूं की कब्र को देखा।उन्होंने मकबरे के बारे में जानना चाहा। डा. मोहम्मद ने उन्हें बताया कि हुमायूं की कब्र पहले पुराना किला स्थित शेर मंडल में थी। वहां से इसे सरहिंद ले जाया गया। वहां से फिर शेर मंडल में लाया गया और वहां से 1572 में इसे इस मकबरे में लाया गया। मकबरे के भ्रमण के दौरान डा. मोहम्मद ने ओबामा को दाराशिकोह के बारे में बताया कि दाराशिकोह ने उपनिषद् का संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया। फिर फारसी से इसका अनुवाद लेटिन में हुआ। लेटिन से जर्मन में हुआ और जर्मन के माध्यम से उपनिषद् का प्रभाव अमेरिका तक पहुंचा। यह जानकर ओबामा अत्यधिक प्रभावित हुए तथा मकबरे के निचने भाग को खुलवाकर दाराशिकोह की कब्र को देखा। उन्होंने इमारत के इतिहास की जानकारी ली तथा मकबरे को घेरे हुए हरे भरे उद्यान को देखा। जिसे आगा खां ट्रस्ट द्वारा 2000 से लेकर 2003 तक संरक्षण का कार्य कर उसकी असली शक्ल में लाया गया है। मिशेल ओबामा ने भी कहा कि बहुत अच्छा लगा। एएसआई की आगंतुक पुस्तिका में ओबामा ने जो टिप्पणी की कि उसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है- अनेक शासकों के उत्थान पतन के बावजूद भारत ने हमेशा विश्र्व को नेतृत्व दिया है, इसके लिए हम भारत और भारत के लोगों के आभारी हैं। दूसरी ओर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने श्रमिकों के लिए तुगलकाबाद किले में संचालित अस्थाई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ओबामा दंपती से मुलाकात करने मकबरा पर बुलाया गया था। ओबामा ने बच्चों से बात की और उनका हालचाल जाना। इस दौरान बातचीत कराने के लिए एक दुभाषिए की मदद ली गई।


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