Tuesday, 9 November 2010

अमर उजाला की नजर से ओबामा - भारत यात्रा

अमर उजाला की नजर से ओबामा - भारत यात्रा
महाशक्तियों का मिलन
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ओबामा के दिल में उतर गया भारत
हिंदी फिल्म शोले के हिट गाने ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेगे...की तर्ज पर सोमवार की रात राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अभिभूत हो गए। रात्रिभोज से पूर्व राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन के लंबे चौड़े लान पर ओबामा और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने ओबामा की इस पहली भारत यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया। राष्ट्रपति के भाषण के बाद ओबामा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अति सुसज्जित टेबल पर रात्रिभोज की शुरुआत की। ओबामा ने भारत और अमेरिका के बीच असाधारण मैत्री भावना प्रकट करने के लिए भारतीय नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। ओबामा ने कहा कि वह भारत अमेरिकी संबंधों के और प्रगाढ़ होने की कामना करते हैं। हमारे संबंध बरकरार हैं, क्योंकि वे लोहे या इस्पात के नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के रेशमी धागों से बंधे हुए हैं।
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भारतीय और अमेरिकी हस्तियां शामिल
सिंह के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, उद्योगपति मुकेश अंबानी, रतन टाटा, कुमारमंगलम बिड़ला, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, तीनों सेना के अध्यक्ष, आईसीआईसीआई की सीएमडी और सीईओ चंदा कोचर तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओपी भट्ट रात्रिभोज में शिरकत कर रहे 172 हाई प्रोफाइल भारतीय और अमेरिकी हस्तियों में शामिल थे। भारत यात्रा पर आए छठे अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और मिशेल ने उसी वक्त से भारत की विविध संस्कृति को महसूस किया जब से 80 साल पुराने रायसीना हिल के शानदार पोर्टिको में उन्हें देश भर के पारंपरिक बिगुल और वाद्य यंत्रों की तान से दो-चार कराया गया। अलवर और बाड़मेर के राजस्थानी मंगनियार गायकों ने पारंपरिक स्वागत गीत ‘आवो नी पधारो म्हारे देस’ गाकर ओबामा दंपति को भारत की संपन्न लोक संस्कृति से रूबरू कराया। ओबामा ने विशेष तौर पर बनाई गई ‘रंगोली’ को भी खूब सराहा।
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लोक नृत्य को पेश किया गया
राजस्थान के लोक संगीतज्ञों ने अतिविशिष्ट मेहमानों के मनोरंजन के लिए सितार, वायलिन, बांसुरी और तबला पर भारतीय शास्त्रीय कलाओं के जौहर दिखाए। पूर्वोत्तर के ‘शिलांग चैंबर कॉयर’ समूह की ओर से खासी समुदाय के लोक नृत्य को पेश किया गया। पियानो वादक नील नॉकिंगरिह की अगुवाई वाले 16 सदस्यीय दल ने अंग्रेजी, हिंदी के साथ-साथ खासी में भी गाने गाकर ओबामा का मनोरंजन किया। बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र अभिनीत सदाबहार फिल्म ‘शोले’ के गीत ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...’’ ने भी महफिल में समां बांध दिया। इस गाने को शायद भारत-अमेरिका की दोस्ती के तौर पर पेश किया गया।
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ओबामा ने किया निहाल
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को संसद में अपने प्रभावपूर्ण संबोधन से भारतीयों का दिल जीत लिया। जहां एक ओर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट पाने की भारत की दावेदारी को लेकर अमेरिका का समर्थन जताया, वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश भी दे डाला। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि पाक सीमा के अंदर आतंकी ठिकाने किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है और इसलामाबाद को मुंबई हमले के दोषियों को कानून के दायरे में लाना होगा। अमेरिका के इस तरह भारत के साथ खड़े होने को भारतीय खेमा बड़ी कामयाबी मान रहा है।
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भारत की तैयारी का स्वागत
दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र की सबसे बड़ी पंचायत, संसद के सेंट्रल हाल से तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैं पुनर्गठित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने की आशा रखता हूं। अमेरिका स्थायी सदस्यता पाने की भारत की तैयारी का स्वागत करता है।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सक्षम, प्रभावशील, विश्वसनीय और विधिसंगत संयुक्त राष्ट्र का पक्षधर है। इस आधार पर मैं कह सकता हूं कि आने वाले वर्षों में ऐसी पुनर्गठित सुरक्षा परिषद चाहता हूं जिसमें भारत स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को अपनी शक्ति बढ़ने के साथ ही बढ़ती जिम्मेदारियों को भी पूरा करना चाहिए। संदेश साफ था कि भारत को म्यांमार में मानवाधिकार उल्लंघन और परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर लागू प्रतिबंध जैसे विषयों पर बोलना चाहिए।
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सुषमा की वाकपटुता के कायल हुए ओबामा
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज को उनकी बेबाकी के लिए विशेष तौर पर धन्यवाद दिया है। सुषमा के साथ लगभग आधे घंटे की मुलाकात में दोनों नेताओं ने हास्य विनोद के माहौल में गंभीर मसलों पर चर्चा की। न तो सुषमा ने अपनी बात कहने में कसर छोड़ी न ही ओबामा ने उसे सुनने में धैर्य की कमी दिखाई। सुषमा ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनसे उत्साहपूर्वक मिले। ओबामा ने होटल में अपने कक्ष के दरवाजे पर उनका स्वागत किया। बातचीत के दौरान दोनों के बीच हास्य विनोद का भी आदान-प्रदान हुआ। बकौल सुषमा आउटसोर्सिंग, टोटालेटेरियन समझौता, पाक प्रायोजित आतंकवाद, चीन और एंडरसन के मुद्दे पर दोनों के बीच गंभीर चर्चा हुई। ओबामा ने अपने सहयोगी को सुषमा की बातों का नोट्स तैयार लेने को भी कहा। ओबामा से मुलाकात के बाद सुषमा ने ‘अमर उजाला’ से बताया कि मुख्य प्रतिपक्ष होने के नाते देश भाजपा से जो अपेक्षा करती है उसी के मुताबिक उन्होंने अपनी बात को बेबाकी के साथ रखा।

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रोजगार जुटाकर गदगद हैं ओबामा
अमेरिका के लिए रोजगार जुटाने की अपनी योजना को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को कहा कि संरक्षणवाद हटाने पर अमेरिकी जनता की रजामंदी के लिए उनकी यह स्कीम बेहद काम आएगी। उन्होंने कहा कि स्वदेश लौटकर वे लोगों को बताएंगे कि भारत ने उनके लिए 50 हजार नौकरियां दी हैं, तो बदले में हमें संरक्षणवाद की बात करना छोड़ना चाहिए। वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कहने से नहीं चूके कि भारत ने कभी भी अमेरिका से नौकरियां नहीं छीनी। बल्कि आउटसोर्सिंग के जरिए भारत ने अमेरिका की उत्पादकता बढ़ाई ही है।
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अमेरिका में नौकरी के अवसर पैदा होंगे
हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय चर्चा के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में ओबामा ने जहां संरक्षणवाद और आउटसोर्सिंग में नरमी लाने का आश्वासन दिया, वहीं प्रधानमंत्री ने इशारों में यह जता दिया कि भारतीयों की वजह से रोजगार जाने की तोहमत मुनासिब नहीं है। बल्कि भारत ने कहीं न कहीं अमेरिका में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद ही की है। ओबामा ने माना भी कि कुछ डील ऐसी हुईं हैं, जिनकी वजह से अमेरिका में नौकरी के अवसर पैदा होंगे। ओबामा साथ ही यह भी कहने से नहीं चूके कि उनके उच्च तकनीक उत्पादों की वजह से भारत में रोजगार के अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ अमेरिकी कंपनियों के उच्च तकनीक उत्पाद भारत को बेचने की योजना है और इन उत्पादों के जरिए भारतीय उद्यमी अपने देश में भी रोजगार पैदा कर पाएंगे। ओबामा ने कहा कि रोजगार बढ़ाना एकतरफा नहीं है बल्कि इससे दोनों पक्ष ही लाभान्वित होते हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने आउटसोर्सिंग पर पाबंदी और संरक्षणवाद को लेकर भारत में पनप रहे रोष से ओबामा को अवगत कराया था। सूत्रों के अनुसार रविवार डिनर से पहले और सोमवार की द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान मनमोहन ने दोनों ही मसलों पर चर्चा की। सिंह ने उच्च तकनीक निर्यात नियम पर नियंत्रण घटाने के अमेरिकी नेता के फैसले का स्वागत भी किया। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता के अमेरिका के समर्थन पर भी मनमोहन ने ओबामा का धन्यवाद किया।
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ऊंट, घोड़े ले जाना चाहते हैं ओबामा
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत से ऊंट और घोड़े अपने देश ले जाना चाहते हैं। राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के दौरान ओबामा राष्ट्रपति के अंगरक्षकों से काफी प्रभावित हुए जो उन्हें अपने साथ लेकर प्रांगण में ले गए जहां राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनका स्वागत किया। अति विशिष्ट व्यक्तियों के साथ मौजूद अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान ओबामा ने राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की तारीफ की और मजाक में कहा कि वह कुछ ऊंट और घोड़े अमेरिका ले जाना चाहते हैं जिस पर वहां मौजूद मेजबान मुस्कुरा पड़े।
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मीडिया से ली जमकर चुटकी
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया से जमकर चुटकी ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ओबामा काफी प्रसन्नचित्त नजर आ रहे थे। उनसे भारतीय पत्रकारों ने अमेरिकी मीडियाकर्मी की ओर से भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट देने के बारे में अमेरिकी रुख पर किए गए सवाल का जवाब देने का दबाव बनाया। ओबामा ने कहा कि मुझे निर्देश है कि केवल एक ही सवाल का एक बार में जवाब दूं। यह आश्चर्यजनक बात नहीं होगी कि भारतीय और अमेरिकी मीडिया परस्पर सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हम ऐसे किसी सहयोग के इच्छुक नहीं है। उनके इतना कहते हुए प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद लोग हंस पड़े।
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ओबामा ने कहा, जयहिंद
खुद को और अपनी पत्नी मिशेल ओबामा को भारत में मिली मेहमाननवाजी का अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को हिंदी में ‘बहुत धन्यवाद’ कहकर शुक्रिया अदा किया। संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के दोनों सदनों के सदस्यों के समक्ष दिए 35 मिनट के अपने संबोधन में ओबामा ने हिंदी के शब्दों, चांदनी चौक जैसे भारत के ऐतिहासिक स्थलों, पंचतंत्र जैसे प्राचीन साहित्य, भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद, एक दलित के उत्थान के रूप में संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव अंबेडकर आदि का जिक्र किया। अपने भाषण का समापन उन्होंने ‘जय हिंद’ कहकर किया जिस पर सांसदों ने तालियां बजाईं। ओबामा ने पंचतंत्र की भी चर्चा की। ओबामा ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो में दिये गये संबोधन का जिक्र किया और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की रचना ‘गीतांजलि’ के कुछ अंशों को भी पढ़ा।
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महिला नेताओं की वजह से सफल है भारतःओबामा
नई दिल्ली। ओबामा ने भारतीय महिला नेताओं की भरपूर सराहना की और उन्हें देश की सफलता का एक मुख्य कारण बताया। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा अपने सम्मान में आयोजित भोज में राष्ट्रपति के अतिरिक्त सोनिया गांधी और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर देखते हुए ओबामा ने कहा, भारत इतना अच्छा कर रहा है क्योंकि उसके पास इतनी मजबूत महिला नेत्रियां हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति इंडोनेशिया रवाना
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत का आधिकारिक दौरा पूरा करने के बाद आज सुबह इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गए। ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल को विदा करने के लिए हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और विदेश सचिव निरुपमा राव मौजूद थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान एयरफोर्स वन ने सुबह लगभग नौ बजे उड़ान भरी। अपने 10 दिनों के एशिया दौरे के पहले पड़ाव के रूप में ओबामा शनिवार को भारत पहुंचे थे। वह इंडोनेशिया के अलावा दक्षिण कोरिया और जापान भी जाएंगे।

दैनिक जागरण की नजर में


इस बात को गोपनीय रखा था ओबामा ने: रिपोर्ट



 अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता पर अपने समर्थन को अंतिम समय तक रहस्य बनाए रखा था। कल भारतीय संसद को संबोधित करने से खड़े होने से कुछ मिनट पहले तक उन्होंने ने इस मामले में भारत को समर्थन देने की अपनी घोषणा के बारे में गोपनीयता बरकरार रखी थी। अमेरिकी अखबारों में मंगलवार को इस खबर को पहले पन्ने पर जगह मिली है।
'वाशिंगटन पोस्ट' ने लिखा है, कि ओबामा ने अपने इस कदम को अंतिम समय तक अपने दिल में छिपाए रखा। संसद में उनका संबोधन शुरू होने से कुछ मिनट पहले तक किसी को यह पता नहीं था कि ओबामा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के मामले में अपने समर्थन की घोषणा करने वाले हैं।
अमेरिकी मीडिया ने भी ओबामा के इस कदम का समर्थन किया है। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन को जवाब देने के लिए यह घोषणा की है। अखबार ने लिखा है कि इससे पता चलता है कि अमेरिका, भारत के साथ अपने आर्थिक और रक्षा संबंधों को और मजबूती देना चाहता है। हालांकि, अखबार ने आगाह किया है कि यह अभी तक तय नहीं है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता कब तक मिलेगी। न ही पेशकश में यह गारंटी दी गई है कि भारत को सदस्यता मिलेगी ही।
'न्यूयार्क टाइम्स' ने लिखा है कि ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत को समर्थन चीन को जवाब देने के लिए किया है। ओबामा का यह कदम चीन को जवाब है।
अखबार ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत को समर्थन से राष्ट्रपति ने यह संकेत दे दिया है कि अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच भागीदारी को और ऊंचाई पर ले जाना चाहता है। साथ ही वह भारत के साथ व्यावसायिक रिश्तों को मजबूती देना चाहता है और चीन को जवाब देना चाहता है।
'टाइम्स' ने चेताया है कि इस कदम से चीन में नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। यह अमेरिका के उन प्रयासों का भी संकेत है कि चीन की बढ़ती ताकत के बीच अमेरिका एशियाई देशों से अपने गठजोड़ को और मजबूत करना चाहता है।
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, भारत को 55 साल पहले 1955 में भी स्थाई सदस्यता की पेशकश की गई थी। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ ने भारत को यह पेशकश की थी, पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था। नेहरू ने कहा था कि भारत के बजाय यह सीट चीन को दे दी जाए।
'लॉस एंजिल्स टाइम्स' ने लिखा है कि ओबामा की यह प्रतिबद्धता भारत के नए अंतरराष्ट्रीय दर्जे की दिशा में सिर्फ एक 
कदम है।

अमेरिका को नहीं थी हेडली के इरादों की पुख्ता जानकारी
नई दिल्ली मुंबई हमले के साजिशकर्ता अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली को लेकर भारत और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के बीच पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान के बाद अब खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मामले में सफाई दी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात में उन्होंने बताया कि मुंबई हमले की तैयारियों और इसमें हेडली के शरीक होने को लेकर उन्हें पक्की खबर नहीं थी। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच नए सिरे से उच्चस्तरीय बातचीत शुरू करने का फैसला भी हुआ। साझा बयान में दोनों देशों ने लश्कर-ए-तैयबा सहित सभी आतंकवादी संगठनों को ध्वस्त करने पर सहमति भी जताई। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार बेन रोड्स ने दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद बताया कि ओबामा ने हेडली मामले की जांच के अब तक के नतीजों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है। हालांकि ओबामा ने बताया कि हेडली की साजिश के बारे में मिली जानकारियां किसी ठोस शक्ल में न होकर टुकड़ों में थी। इनके आधार पर यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता था कि मुंबई पर इस तरह के हमले की तैयारी हो रही है। भारत के ऐतराज के बाद अमेरिका ने इस बारे में पूर्ण समीक्षा करने के लिए अपने खुफिया ब्यूरो के प्रमुख को इसकी जांच सौंप दी थी। इस मामले पर भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ओबामा ने इसकी जानकारी सीधे प्रधानमंत्री को दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संसद में अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की जंग को अपना भरपूर नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम लेते हुए उसे सावधान किया कि उनकी सीमा के अंदर आतंकवादियों के लिए अभयारण्य को मंजूर नहीं किया जा सकता। संसद के साझा सत्र में उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तानी नेताओं से यह जोर देकर कहते रहेंगे कि उनकी सीमा के भीतर चल रहे आतंकवादियों के अभयारण्य स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही मुंबई हमले के पीछे शामिल आतंकवादियों को कानून की गिरफ्त में लाना होगा। इसके अलावा दोनों नेताओं के साझा बयान में भी आतंकवाद के खिलाफ साझी लड़ाई की बात विस्तार से आई। इस बयान में कहा गया कि लश्कर-ए-तैयबा सहित सभी आतंकवादी संगठनों को ध्वस्त करने की जरूरत पर दोनों राष्ट्र सहमत हैं। आतंकवाद को मिल रही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद की कड़ी निगरानी की जरूरत पर भी सहमति जताई गई। इससे पहले भारत अमेरिकी सरकार को लेटर रोगट्री भेजकर उससे हेडली की दो बीवियों की शिकायतों के बारे में पूरी जानकारी मांगने की तैयारी में था। अमेरिकी सूत्रों ने हाल में बताया था कि हेडली की पत्नियों ने मुंबई हमले से पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी दे दी थी कि वह भारत के खिलाफ खास अभियान की साजिश रच रहा है। भारत जानना चाहता है कि मुंबई हमले से पहले हेडली की गतिविधियों को लेकर कब-कब और कितनी जानकारी अमेरिकी एजेंसियों के पास थी। पिछले हफ्ते ही चिदंबरम ने हेडली के बारे में अमेरिकी की ओर से जानकारी छुपाने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि अमेरिका में इसकी समीक्षा हो रही है और इसके खत्म होने का इंतजार किया जाना चाहिए

बापू की समाधि पहुंच अभिभूत हुए ओबामा
नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति महात्मा गांधी से सबसे अधिक प्रभावित हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। यह बातें आज फिर उन्होंने राजघाट पर दोहराई। उन्होंने बापू की समाधि पर फूल चढ़ाए तथा उनके जीवन से जुड़ी चीजों को देखा। राजघाट की ओर से उन्हें विशेषतौर पर केरल से मंगाया गया गुलाब की लकड़ी से बना चरखा भेंट किया गया। केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद व महात्मा गांधी समाधि स्थल राजघाट के सचिव रजनीश कुमार भी मौजूद थे। रजनीश कुमार ने बताया कि जब कोई विशिष्ठ अतिथि समाधि स्थल आता है तो उसे गांधी की प्रतिमा भेंट की जाती है, लेकिन ओबामा के लिए विशेषतौर पर केरल से मंगाया गया गुलाब की लकड़ी से निर्मित चरखा भेंट किया गया। ओबामा राजघाट पर करीब 20 मिनट तक रुके तथा उन्होंने गांधी समाधि के बारे में कई छोटी-छोटी जानकारियां प्राप्त करने में रुचि दिखाई। भेंट की गई पुस्तकें : राजघाट के सचिव रजनीश कुमार ने बताया कि ओबामा को तीन पुस्तकें भेंट की गई, जिनमें बापू की आत्मकथा सुशीला नैय्यर लिखित द माइंड आफ महात्मा गांधी और महात्मा गांधी एंड 100 डेज शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को एक्रिलिक की बनी गांधी की प्रतिमा एवं सात बुराइयों को दर्शाने वाले खादी से बना रोल भी भेंट किया गया। ओबामा अपने साथ गांधी समाधि स्थल के लिए बापू के जीवन से प्रभावित मार्टिन लूथर किंग की याद में वाशिंगटन डीसी में बन रहे स्मारक में इस्तेमाल एक पत्थर का टुकड़ा लाए थे। बराक ओबामा ने आगंतुक पुस्तिका में अंग्रेजी में लिखा, उसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है- जिस महान आत्मा ने अपने शांति, संयम, प्यार के संदेश से पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया, हम उसे हमेशा याद रखेंगे। उनके निधन को 60 से अधिक साल गुजरने के बाद भी उनकी आभा दुनिया को प्रेरणा देती है। दूसरी ओर बापू के समाधि स्थल से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रस्थान के बाद राजघाट पर बड़ी संख्या में पर्यटक आने शुरू हो गए और विशेषतौर पर बच्चों में समाधि स्थल पर ओबामा की ओर से अर्पित बड़े पुष्प चक्र के समक्ष बैठकर फोटो खिंचवाने की होड़ लगी हुई थी। सुरक्षा कारणों से राजघाट को आम जनता के लिए तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया था। ओबामा की ओर से बापू की समाधि पर अर्पित पुष्पचक्र के समक्ष बैठकर फोटो खिंचवाने के लिए कतार लग गई थी

बराक भी बीवी के आगे हो जाते हैं चित
नई दिल्ली जिसके नाम की पूरी दुनिया में धाक है, वह व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने चित हो जाता है। भले ही यह आश्चर्यजनक लगे लेकिन सत्य है। विश्व के सबसे ताकतवर व्यक्ति व अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा पत्नी मिशेल के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। इसका खुलासा मिशेल ओबामा ने सोमवार सुबह राजधानी में स्कूली छात्रों से खास मुलाकात के दौरान किया। उन्होंने छात्रों के सवाल के जवाब में कहा कि पति-पत्नी के बीच झगड़ा होने के बाद बराक ओबामा ही उन्हें मनाते हैं। अमेरिका की पहली महिला मिशेल ओबामा ने भारत के चार संस्थाओं के 17 छात्र-छात्राओं को मिलने का आमंत्रण भेजा था। सोमवार दोपहर प्रगति मैदान के नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम में उन्होंने छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से भारतीय सभ्यता व संस्कृति के बारे में जानकारी ली और छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया। नन्हीं छाया संगठन के नेतृत्व में पंजाब व राजस्थान की चार प्रतिभाशाली व गरीब छात्राएं मिशेल ओबामा से मिलने की खुशी से फूले नहीं समा रही हैं। पंजाब के अमृतसर जिले की दलित छात्रा मनप्रीत कौर व रमनप्रीत कौर ने उन्हें पंजाबी में लिखा पत्र भी सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा था कि हथियार मत बेचो क्योंकि यह देशों में नफरत फैलाते हैं। छात्राओं ने समाज में खुशहाली लाने के लिए प्यार बांटने का पैगाम दिया। मिशेल के अमृतसर नहीं आने के सवाल पर उन्होंने छात्रों से वायदा किया वे अगली बार अमृतसर आएंगी तथा स्वर्ण मंदिर के दर्शन जरूर करेंगी। उन्होंने छात्राओं के पत्र का जबाव भी देने का आश्वासन दिया। राजस्थान के श्रीगंगा नगर जिले से आई छठी की छात्रा अप्रीत तथा अंकिता ने मिशेल से पूछा कि उन्हें भारत में क्या पसंद आया तो उन्होंने कहा कि भारत के खाने का कोई जबाव नहीं है। वह डेढ़ घंटे तक छात्रों के साथ रहीं। उन्होंने छात्रों को व्हाइट हाउस के लोगो वाला हैंड बैग सहित अपने हस्ताक्षर वाला मिठाई का डब्बा, मार्कर व विशेष टोपी भी दी। छात्राओं का कहना है कि इस मुलाकात से उन्हें समाज के लिए कुछ करने की सीख मिली है। इन छात्राओं के साथ अमृतसर के किला जीवन सिंह गांव की युवा महिला सरपंच बलजीत कौर व शिक्षक मनप्रीत कौर भी मौजूद थीं। नन्हीं छाया के चेयरमैन हरपाल सिंह ने बताया कि उनकी संस्था राजस्थान, पंजाब व दिल्ली में लिंग अनुपात व पर्यावरण संरक्षण पर लोगों को जागरूक कर रही है। इस काम में उन्हें इन छात्राओं का सराहनीय योगदान मिल रहा है। ओबामा ने लिया स्पा का मजा आईटीसी मौर्या में ठहरे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत में अपने सबसे व्यस्त दिन की शुरुआत इस होटल के स्पा में बिता कर की। पांच सितारा होटल के स्पा कायाकल्प में अपने तन-मन को स्फूर्ति से भर लिया। साथ ही हल्का व्यायाम भी किया। इसी होटल के बुखारा रेस्तरां में बराक ओबामा अपनी पत्‍‌नी मिशेल के साथ शाम को ओबामा थाली का आनंद उठाया। इस थाली में कबाब, टिक्का, सलाद और पारंपरिक भारतीय मिठाइयां शामिल रहीं। ओबामा थाली में तंदूरी रान, तंदूरी सलाद, मुर्ग खुरचन, फिश टिक्का, रेशमी कबाब, शिकंदरी रान और तंदूरी आलू जैसे उत्तर भारतीय और मुगलई व्यंजनों का एक अच्छा मिश्रण शामिल है। मिठाई के रूप में ओबामा के पास रसमलाई और कुल्फी का विकल्प था



अब बराबरी पर हुई अमेरिका से बात
नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे ने पहली बार दोनों देशों के रिश्तों की इबारत को बराबरी पर साधने की कोशिश की। इसमें आतंकवाद को लेकर भारत की रणनीतिक जरूरतों और तेज रफ्तार विकास के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को जगह दी गई है। वहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारत की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के इंजन से जोड़ने का भी इंतजाम है। ओबामा जाते जाते विदाई तोहफे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर भारतीय दावे पर समर्थन का ऐलान कर गए तो अपनी अर्थव्यवस्था के लिए एक लाख से अधिक रोजगार देने वाले सौदे बटोर ले गए। हालांकि दोनों देशों के रिश्तों में आउटसोर्सिग से लेकर आतंकवाद पर जमीनी सहयोग के ऐसे कई मोर्चे हैं जहां भागीदारी के नारे तो हैं लेकिन जमीनी साझेदारी का रास्ता पथरीला है। भारतीय खेमे की नजर में ओबामा के दौरे ने दोनों देशों के रिश्ते को दाता और याचक की बजाए बराबरी के लेन-देन में बदलने में मदद की है। वैसे इस बार कई मोर्चो पर भारत का सख्त रुख भी देखने को मिला। मामला पाक समर्थित आतंकवाद पर अमेरिका के रुख का हो या फिर आउटसोर्सिग और अमेरिकी अर्थव्यव्सथा में बढ़ती संरक्षणवादी नीतियों का। हर मोर्चे पर दोनों देशों के बीच सियासी संकेतों से लेकर ठोस करारों के सौदे साफ नजर आए। परमाणु करार के बाद भारत के साथ अमेरिका ने नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की भागीदारी का ऐलान किया। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के दौरे को कठिन बता चुके ओबामा मेजबान के आग्रह को भी नहीं ठुकरा पाए और रवाना होने से पहले इसका ऐलान कर गए। ओबामा को फौरी तौर पर कोई बड़ा तोहफा हाथ न लगा हो लेकिन भारत की रक्षा खरीद के केक में बड़ी अमेरिकी हिस्सेदारी के दावे को और मजबूत कर दिया है। वहीं दस सी-17 विमानों के सौदे ने अमेरिका के कैलिफोर्निया के लांग बीच स्थित बोइंग प्लांट में कई नौकरियों की व्यवस्था कर दी है

शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसून में बढ़ेगा सहयोग
नई दिल्ली कुछ ठोस नतीजे भले ही अभी सामने न हों, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे के साथ भारत-अमेरिका के बीच शैक्षिक रिश्ते की गर्माहट जरूर बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा में कई तरह के आदान-प्रदान और एक दूसरे को मजबूती देने की जमीन तैयार हो गई है। उसे और आगे बढ़ाने के लिए ही दोनों देश अगले साल उच्च शिक्षा पर साझा सम्मेलन (एजूकेशन समिट) करेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह अभी नहीं तय है कि एजूकेशन समिट कहां होगी, लेकिन इतना जरूर है कि उससे दोनों देशों के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान का रास्ता जरूर खुलेगा। बताते हैं कि भारत की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और अमेरिका की ओर से वहां की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन इस समिट की अगुआई करेंगी। इस बीच ओबामा के भारत दौरे के साथ ही ज्ञान आधारित पहल के लिए मनमोहन सिंह-ओबामा संयुक्त कार्यसमूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप फॉर सिंह-ओबामा नॉलेज इनीशिएटिव) में तेजी आ गई है। बीते साल नवंबर में शुरू हुई इस पहल के लिए भारत सरकार ने समूह का गठन कर दिया है। भारत की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक नायर, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अपर सचिव (उच्च शिक्षा) सुनील कुमार और संयुक्त सचिव अमित खरे उसमें शामिल हैं जबकि अमेरिकी उच्चायोग के अधिकारी माइकल प्लेटियर, एलिजाबेथ थारनिल और एलिजावेथ वारफील्ड को इस समूह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस पहल के तहत दोनों देशों को 5-5 मिलियन डॉलर का साझा फंड बनाना था। भारत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उसके लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिए हैं। पहल के आगे बढ़ने के साथ ही दोनों देशों के विश्वविद्यालयों व दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों को एक-दूसरे के करीब आने, मौजूदा जरूरतों के लिहाज से शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और उनके आदान-प्रदान का भी रास्ता खुलेगा। उसी क्रम में भारत ने नेहरू फुलब्राइट स्कॉलरशिप में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी का भी फैसला किया है। यह स्कॉलरशिप अमेरिका जाकर पढ़ाई करने वाले प्रतिभाशाली भारतीय छात्रों को दी जाती है। इस बीच, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने उच्च शिक्षा में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए नई कोलाबोरेशन नीति बनाने का फैसला किया है



बहुत धन्यवाद.. महात्मा गांधी..जयहिंद!
नई दिल्ली संसद में राष्ट्रपति ओबामा ने अपने भाषण में राष्ट्रपति महात्मा गांधी से लेकर धन्यवाद, पंचतंत्र और जयहिंद जैसे कई ऐसे प्रचलित हिंदी शब्दों का प्रयोग किया जिनसे आम भारतीय की नब्ज को छुआ जा सकता है। अपने 36 मिनट के धाराप्रवाह भाषण में ओबामा ने 37 बार सांसदों की तालियां बटोरीं जिनमें सबसे ज्यादा देर तक तालियां तब बजीं जब ओबामा ने पाकिस्तान को आतंकवाद का अभयारण्य बनने के खिलाफ नसीहत दी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारतीय दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया। संसद भवन के पोर्टिको में ओबामा का काफिला ठीक शाम 5:28 बजे पहंुचा। उप राष्ट्रपति मुहम्मद हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार व संसदीय कार्य पवन कुमार बंसल ने उनकी अगुवानी की। संसद के केंद्रीय कक्ष में पहुंचते ही ओबामा ने सांसदों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को देखकर ओबामा पहले थोड़ा ठिठके, फिर अपनी तरफ से हाथ मिलाया और आगे बढ़ गए। बाद में उन्होंने गोल्डन बुक में बाएं हाथ से अपनी लंबी टिप्पणी दर्ज की। उप राष्ट्रपति के स्वागत भाषण के बाद ओबामा ने 5:41 बजे अपने भाषण की शुरुआत की। भाषण के दौरान उन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, बहुत धन्यवाद, पंचायत, पंचतंत्र जैसे हिंदी शब्दों का प्रयोग किया। यही नहीं, कोलकाता, पंजाब, चांदनी चौक व बंगलुरु का भी जिक्र करना भी नहीं भूले। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की कृति गीतांजलि की कुछ पंक्तियों को भी उद्धृत किया जबकि जयहिंद बोलकर अपने भाषण का समापन किया। उन्होंने एक से अधिक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया। इस दौरान जहां खूब तालियां बजीं वहीं वामपंथी सदस्यों ने इससे गुरेज किया। ओबामा ने मीरा कुमार के समापन भाषण के अंग्रेजी अंश को गौर से सुना, लेकिन जैसे ही मीरा ने हिंदी में बोलना शुरू किया, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भाषाई अनुवाद सुनने के लिए कान में हेड फोन लगा लिया। 6:25 बजे कार्यक्रम के समापन के बाद बाहर निकलते समय ओबामा ने उपस्थित जनों का फिर से अभिवादन किया। इस दौरान सपा सांसद घनश्याम अनुरागी व कांग्रेस सांसद महाबल मिश्रा ने उनसे हाथ मिलाया। इस बीच बसपा के राज्यसभा सांसद प्रमोद कुरील ने अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ किताबें भेंट कीं। सांसदों ने ओबामा का भाषण गर्मजोशी से सुना। संसद के केंद्रीय कक्ष में पौने दो बजे से ही सांसदों का आना शुरू हो गया था। केंद्रीय कक्ष की सीटें भर जाने पर कुछ लौट गए तो कुछ ने संसद भवन के दूसरे कक्षों में बैठकर अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण सुना। केंद्रीय कक्ष को जाने वाले रास्तों व संसद भवन के गलियारों और अन्य स्थानों को रेड कारपेट व फूलों से सजाया गया था

कृषि-रिटेल के दरवाजे खोले भारत
नई दिल्ली अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के पहले दिन ही राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साफ कर दिया कि उनके एजेंडे में आर्थिक संबंध सबसे ऊपर हैं। देश के शीर्ष उद्योग जगत के साथ अपनी पहली बैठक में ओबामा ने भारतीय नीति निर्धारकों को भी संदेश दे दिया है कि वह यहां रिटेल क्षेत्र को खोलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आउटसोर्सिग पर अपने रवैये में कोई खास नरमी नहीं दिखाते हुए बराक ने भारत को उच्च तकनीकी का निर्यात शुरू करने के संकेत जरूर दिए। अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) की तरफ से मुंबई में आयोजित बैठक में दोनों देशों के सैकड़ों उद्योगपति और शीर्ष कंपनियों के सीईओ मौजूद थे। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अपनेएजेंडे को रखने का इससे बढि़या मौका नहीं मिल सकता था। उन्होंने इसका फायदा भी भरपूर उठाया। पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति की भरपूर सराहना करते हुए ओबामा ने भारत को भविष्य का बाजार बताया। यही कारण है कि उन्होंने हर उस मुद्दे को उठाया, जो अमेरिकी कंपनियों के हित का है। अपने भाषण में उन्होंने दो बार रिटेल का जिक्र किया और परोक्ष तौर पर यह संदेश भी दिया कि इसके खोले जाने से भारत की छोटी खुदरा दुकाने बंद नहीं होंगी। उन्होंने रिटेल और संचार दो ऐसे क्षेत्र बताए, जहां व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की बेहद जरूरत है। इस क्रम में उन्होंने कृषि का भी जिक्र किया। अमेरिकी कंपनियां भारत की कृषि व रिटेल क्षेत्र में ज्यादा उदारवादी नीतियों के लिए पहले से ही लॉबिंग कर रही हैं। ओबामा की नजर में ढांचागत व नियामक संबंधित समस्याएं भी काफी महत्व रखती हैं। आउटसोर्सिग पर ओबामा ने खास अंदाज में कहा कि अमेरिका में कई लोग यह समझते हैं कि वहां की नौकरियां भारत आ रही हैं। इसमें सच्चाई भी है। वैसे उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ते को संभावनाओं से काफी कम बताया। बराक ने कहा कि अमेरिका भारत से ज्यादा नीदरलैंड को निर्यात करता है, जिसकी आबादी मुंबई से भी कम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं। ओबामा के शब्दों में, मुझे ऐसी कोई वजह दिखाई नहीं देती कि भारत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देशों में क्यों नहीं शामिल हो सकता। अमेरिकी कंपनियों के लिए भरपूर बैटिंग करने के साथ ही ओबामा ने भारतीय उद्योग जगत और राजनेताओं को भी भरोसा दिलाया कि वह द्विपक्षीय रिश्ते में उनकी दिक्कतों को दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार एक तरफा नहीं हो सकता, फायदा दोनों का होना चाहिए। व्यापार संबंधी अन्य दिक्कतों पर उनके व्यापार सचिव अगले कुछ महीनों के भीतर ही भारत की यात्रा करेंगे, जहां इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। भारत का मध्यवर्ग अमेरिकी कंपनियों को करेगा आकर्षित नई दिल्ली, एजेंसी : अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत की तेजी से बढ रही मध्यवर्गीय आबादी अमेरिकी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करेगी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री गैरी लाक ने कहा कि उनका देश भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी, बिजली, वित्तीय सेवाओं, उच्च प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और व्यापार के विशाल अवसर देख रहा है। राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा के संदर्भ में लाक ने यह स्पष्ट किया किया कि भारतीय उद्यमियों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत की प्राथमिकताओं में भारत के खुदरा व्यवसाय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम और उदार बनाने के मुद्दे को विशेष महत्व देने जैसी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की बढती मध्यवर्गीय आबादी अमेरिकी कंपनियों को यहां निवेश के लिए निश्चित रूप से आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सामानों को भारत में असेंबल करके उनका कारोबार करने की विशाल संभावना है। इससे भारत में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के उपलक्ष्य में भारत आई अमेरिकी उद्योग जगत की हस्तियों में जीई कंपनी के इमेल्ट, हानीवेल के डैवेकोटे, पेप्सी की इंदिरा नूई, एईएस के पाल हैनराहन और बोईंग के कुछ प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टॉम डोनिलोन ने मुंबई में एक बयान में कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत अमेरिकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मकबरा देख ओबामा बोले, अद्भुत
नई दिल्ली ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा ने मुगल काल की बेमिसाल इमारत हुमायूं का मकबरा देखा। यह ऐतिहासिक विरासत 450 साल पुरानी है। इस स्मारक की खासियत यह है कि इसमें तीन देशों की वास्तुकला दिखाई देती है। मकबरे की छतरियां व कलश भारतीय वास्तुकला का नमूना है तो मुख्य गुम्बद का डिजाइन समरकंद का है और आर्च में पश्चिमी सभ्यता की झलक है। ओबामा के साथ उनकी पत्‍‌नी मिशेल ओबामा भी थीं। आपको बता दें कि हुमायूं के मकबरे से ही प्रेरित होकर वास्तुकारों ने दुनिया के सातवें अजूबे में शामिल आगरा के ताजमहल के निर्माण का रास्ता तैयार किया था। इसी इमारत की वास्तु के तर्ज पर 17वीं सदी में ताजमहल का निर्माण किया गया था। ओबामा अमेरिका के पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो हुमायूं का मकबरा देखने गए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक गौतम सेनगुप्ता, दिल्ली मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. के.के. मोहम्मद, आगा खां ट्रस्ट के दिल्ली मंडल के संयोजक व वरिष्ठ वास्तुकार रतीश नंदा, एएसआई के अधिकारी बसंत कुमार व आर.के. झिंगन ने प्रवेश द्वार पर ओबामा का स्वागत किया। ओबामा ने जब गेट से प्रवेश किया तो मुख्य इमारत को देखकर उन्होंने कहा कि अद्भुत इमारत है। एएसआई के दिल्ली मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. के.के. मोहम्मद ओबामा दंपति को मकबरा दिखाने ले गए। उन्होंने पूरे मकबरे का भ्रमण किया तथा बारीकी से जानकारियां लीं। उन्होंने हुमायूं की कब्र को देखा।उन्होंने मकबरे के बारे में जानना चाहा। डा. मोहम्मद ने उन्हें बताया कि हुमायूं की कब्र पहले पुराना किला स्थित शेर मंडल में थी। वहां से इसे सरहिंद ले जाया गया। वहां से फिर शेर मंडल में लाया गया और वहां से 1572 में इसे इस मकबरे में लाया गया। मकबरे के भ्रमण के दौरान डा. मोहम्मद ने ओबामा को दाराशिकोह के बारे में बताया कि दाराशिकोह ने उपनिषद् का संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया। फिर फारसी से इसका अनुवाद लेटिन में हुआ। लेटिन से जर्मन में हुआ और जर्मन के माध्यम से उपनिषद् का प्रभाव अमेरिका तक पहुंचा। यह जानकर ओबामा अत्यधिक प्रभावित हुए तथा मकबरे के निचने भाग को खुलवाकर दाराशिकोह की कब्र को देखा। उन्होंने इमारत के इतिहास की जानकारी ली तथा मकबरे को घेरे हुए हरे भरे उद्यान को देखा। जिसे आगा खां ट्रस्ट द्वारा 2000 से लेकर 2003 तक संरक्षण का कार्य कर उसकी असली शक्ल में लाया गया है। मिशेल ओबामा ने भी कहा कि बहुत अच्छा लगा। एएसआई की आगंतुक पुस्तिका में ओबामा ने जो टिप्पणी की कि उसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है- अनेक शासकों के उत्थान पतन के बावजूद भारत ने हमेशा विश्र्व को नेतृत्व दिया है, इसके लिए हम भारत और भारत के लोगों के आभारी हैं। दूसरी ओर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने श्रमिकों के लिए तुगलकाबाद किले में संचालित अस्थाई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ओबामा दंपती से मुलाकात करने मकबरा पर बुलाया गया था। ओबामा ने बच्चों से बात की और उनका हालचाल जाना। इस दौरान बातचीत कराने के लिए एक दुभाषिए की मदद ली गई।


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कश्मीर पर समाधान नहीं थोप सकतेः ओबामा

नई दिल्ली में दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर बात की. कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "अमेरिका कोई समाधान नहीं थोप सकता." लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने समस्या के समाधान के लिए दोनों देशों को मदद की पेशकश की है. ओबामा मानते हैं कि तनाव को कम करना दोनों ही देशों के हित में है. लेकिन मनमोहन सिंह ने साफ किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कारगर कदम नहीं उठाता, बातचीत शुरू नहीं हो सकती.
हाल के महीनों में हिंसा का शिकार रहने वाली कश्मीर घाटी में अलगाववादी नेता बार बार अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग करते रहे हैं. पाकिस्तान सरकार भी इस दिशा में खासी सक्रिय रही है. लेकिन भारत कश्मीर समेत पाकिस्तान के साथ किसी भी दोतरफा मुद्दे पर बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ रहा है. यही वजह है कि ओबामा इस बारे में खासे सचेत हैं. सोमवार को घाटी में अलगवावादी नेताओं की अपील पर हड़ताल जारी है.
राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद से निपटने और परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर और नजदीकी तौर पर काम करने पर सहमत हुए हैं. ओबामा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने कुछ महीनों में पाकिस्तान और भारत कश्मीर पर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को सुलझाने के लिए कोई तरीका निकालेंगे.
मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत परमाणु सुरक्षा और बीमारियों की रोकथाम के लिए नए केंद्र बनाएगा. साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका की तरफ से निर्यात बाधाओं को आसान बनाए जाने के बाद दुनिया के दो बड़े लोकतंत्रों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत को एक स्थापित विश्व शक्ति बताया है. सोमवार को उन्हें राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में लाल कालीन पर 21 तोपों की सलामी दी गई. अपने सम्मान में दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण के ओबामा ने पत्रकारों से कहा, "भारत सिर्फ एक उभरती हुई ताकत नहीं है, बल्कि अब यह विश्व शक्ति है."
सोमवार को ही ओबामा भारतीय संसद को संबोधित करेंगे जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र में सुधारों पर अपना रुख रख सकते हैं. खास कर भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अमेरिका का समर्थन चाहता है जिस पर अमेरिका अभी तक साफ साफ आश्वासन देने से बचता रहा है.

भारत को मिलेगी स्थायी सीट, ओबामा की उम्मीद


ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन करते हुए जल्द ही इस उम्मीद के पूरा होने की कामना की. भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते समय ओबामा ने यह बात कहीं.
अपना भारत प्रेम दर्शाने के लिए ओबामा ने बीच बीच में हिंदी शब्दों का भी इस्तेमाल किया. उन्होंने भारत में पिछले तीन दिनों में पत्नी मिशेल और उनके जोरदार स्वागत के लिए शुक्रिया अदा किया. ओबामा ने कहा "एक अरब से ज्यादा लोगों के प्रतिनिधित्व करने वाले भारत की संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के माध्यम से अपना शुक्रिया अदा करता हूं."
ओबामा ने भारत में अपनी गर्मजोशी भरी आवभगत के लिए हिंदी में कहा, "बहुत धन्यवाद".  इसके बाद ओबामा ने भारत की चार हजार साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत का हवाला देकर कहा कि इसे संजो कर रखने का काम वाकई दुनिया के लिए अनुकरणीय है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद और इससे पहले प्राचीन काल तक का भारत का इतिहास हर क्षेत्र में दुनिया को  नई राह दिखाने का गवाह रहा है. प्राचीन समय में शून्य का ईजाद करने से लेकर चांद पर तिरंगा फहराने, भूख का सामना करने पर हरित क्रांति करने और सुपर कंप्यूटर बनाने तक की उपलब्धियां दुनिया ने देखी हैं. यही वजह है कि आज भारत दुनिया के नक्शे पर छा गया है.
ओबामा ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा "गांधी जी का अंहिंसा का दर्शन और सरकारों के लिए अंतिम व्यक्ति को लक्ष्य बनाकर काम करने का संदेश दुनिया की बेहतर तस्वीर बनाने का एकमात्र विकल्प है. यही वजह है जब मैं कहता हूं कि भारत और अमेरिका की साझी विरासत और मूल्य 21 वीं सदी  में दुनिया की अगुवाई कर सकते हैं."

मनमोहन गरजे, हम डरते नहीं हैं

आमतौर पर चुप और शर्मीले से दिखने वाले मनमोहन सोमवार को ओबामा के साथ साझी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलग ही रंग में नजर आए. उन्होंने हर सवाल का साफ साफ और खरा खरा जवाब दिया.

 
साझी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिका का रटा रटाया रुख दोहराया कि भारत और पाकिस्तान को आपस में बातचीत शुरू करनी चाहिए और कश्मीर मसले को सुलझाने के लिए काम करना चाहिए. लेकिन मनमोहन सिंह ने इस बारे में टका सा जवाब दिया. उन्होंने कहा, "हम क-शब्द से डरते नहीं हैं. लेकिन बातचीत तभी हो सकती है जब पाकिस्तान आतंकवाद पर अपनी नीति को बदले. ऐसा नहीं हो सकता कि आप एक तरफ बात करें और दूसरी तरफ आतंकवाद की मशीन हमेशा की तरह चालू रहे."
मनमोहन सिंह पहले भी पाकिस्तान को लेकर नरमबयानी कर चुके हैं और ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान के साथ वह समस्याओं को हल करने के लिए नरम पड़ने से भी नहीं हिचकते. लेकिन सोमवार को मनमोहन सिंह का अलग रूप दिखाई दिया. वह हर मुद्दे पर सख्त नजर आए. जब अमेरिकी पत्रकारों ने उनसे आउटसोर्सिंग और अमेरिकी नौकरियों पर सवाल किया तो उन्होंने कहा, "भारत अमेरिकियों से नौकरियां चुराने का काम नहीं करते."
हाल के महीनों में बराक ओबामा ने कई बार भारत में हो रही आउटसोर्सिंग को निशाना बनाया है. भारत यात्रा के दौरान भी उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग यह मानते हैं कि भारत उनकी नौकरियां चुरा रहा है. लेकिन सोमवार को मनमोहन सिंह ओबामा के सामने सख्त रुख में पेश आए. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि आउटसोर्सिंग उद्योग ने अमेरिकी उद्योग की क्षमता और उत्पादकता को बढ़ाने में ही मदद की है."

ओबामा के दौरे से जो चाहा, वह मिलाः अमेरिका

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पीजे क्राउली ने कहा, "हम मानते हैं कि इस दौरे में वह सब कुछ हासिल हुआ जिसकी हमें आशा थी. जैसा कि राष्ट्रपति ने खुद भी कहा कि सरकार चाहे डेमोक्रैट्स की हो या रिपब्लिकंस की, यह लगातार तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत दौरा था. इससे दोनों देशों के रिश्तों और भारत की बढ़ती अहमियत के बारे में पता चलता है. राष्ट्रपति ओबामा ने भी यह साफ किया है कि वह भारत का दौरा करने वाले आखिरी अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं होंगे."
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने भारत दौरे के पहले चरण में शनिवार को मुंबई पहुंचे. बाद में वह दिल्ली गए. मुंबई में ओबामा ने भारत अमेरिकी रिश्तों के व्यापारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहुलओं पर ज्यादा ध्यान दिया. दोनों देशों के बीच 10 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिससे अमेरिका में नौकरी के हजारों अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
वहीं दिल्ली में दोतरफा रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर चर्चा हुई. ओबामा के भारत दौरे के बाद व्हाइट हाउस से जारी बयान के मुताबिक, "मौजूदा दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत जरूरी हैं. रणनीतिक संबंधों में बहुत से मुद्दे, गतिविधियां और ऐसे कार्यक्रम आते हैं जो राष्ट्रपति ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विजन को दिखाते हैं. इनसे न सिर्फ अमेरिका और भारत के लोगों को फायदा होगा बल्कि पूरी दुनिया को भी लाभ मिलेगा."
ओबामा ने सोमवार को भारतीय संसद के साझा अधिवेशन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का समर्थन किया. साथ ही मुंबई के आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सघन सहयोग पूरी दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए बेहद जरूरी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी एशिया यात्रा के दूसरे पड़ाव में इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गए हैं. इसके बाद वह जापान और दक्षिण कोरिया भी जाएंगे.